जूते की सिलाई

“माँ देखो न मेरे स्कूल के जूते फिर से फट गए”……रोनी सी सूरत और थोड़े गुस्से में मुन्नी बड़बड़ाती हुई स्कूल से घर पहुंची। माँ रसोई में ही मुस्कुराती हुई बोली , “चलेंगे आज शाम में जूता सिलवाने। ” कहते कहते थाली में मज़ेदार पनीर की सब्ज़ी और रोटी के साथ साथ एक लड्डू भी लायी। शाम को माँ……. चाय और मुन्नी ……… bournvita पीते हुए पापा की वेट कर रहे थे और पापा के स्कूटर की आवाज़ सुनते ही मुन्नी दौड़ के दरवाज़े पे पहुँच गयी और बोली, “पापा आज जूता सिलवाने चलेंगे “

माँ (आँखों में चमक के साथ पापा से पूछती हुई), “क्या हुआ ?”
पापा , ” बोहत अच्छा बोनस मिला है इस बार !”
माँ , “वाह अब हम इस बार छत्त पर कमरा बनवा लेंगे, अम्मा और बाबू जी को नीचे का कमरा दे देंगे और हम ऊपर वाले में चले जाएंगे। “
पापा , “मैं सोच रहा था कहीं घूम आते। “
माँ , ” अरे नहीं, अगले साल माँ और बाबू जी को चार धाम की यात्रा ले जाना है उसके लिए रख लेंगे पैसे। “
पापा , “हां ये ठीक है। “

मुन्नी की ख़ुशी जूते सिलवाने की नहीं बल्कि रास्ते में माँ की सहेली रचना के घर पे समोसे खाने की थी। उसे क्या पता था की रचना और माँ का तो परसों ही झगड़ा हो गया था। सब निकल गए जूता सिलवाने , मुन्नी का दिल टूट गया जब माँ ने पापा से कहा, “नहीं रचना के यहाँ नहीं जाएंगे….. बस। ” जूता सिलता देखते हुए माँ के मन में एक बात आयी…….. जूता रिपेयर कराने आ गयी। अपनी बचपन की सहेली से भी रिश्ता रिपेयर?

लौटते में जाने माँ ने ६ समोसे पैक करवाए और बोली , “सुनो वापसी में रचना के यहाँ रुकेंगे। ” बस इस शाम में जूता भी ठीक हो गया, रचना और माँ का झगड़ा भी और समोसे भी खा लिए। “

इसी तरह जूते को तब तक सिलवाते थे जब तक की पाँव जूते में फंसने से इंकार न कर दे।

पता नहीं कब मुन्नी बड़ी हो गयी और उसकी अपनी एक नन्ही गुड़िया स्कूल जाने लगी। नानी घर पे आयी हुई थी। एक दोपहर जब नानी टीवी के सामने कई घंटों से बैठी, स्वेटर बुन रही थी और मुन्नी जाने फ़ोन और कंप्यूटर पर सुबह से क्या नेटफ्लिक्स देख रही थी, गुड़िया हाथ में जूता लिए स्कूल से आयी और ज़ोर से चिल्लाई , “Mom …it was so embarrassing, my shoe sole is gone” नानी ने जूता देखा और हंस दी…. अरे ये तो बस एक मिनट में जुड़ जायेगा, चलना शाम में मेरे साथ मोची के पास। गुड़िया और मुन्नी दोनों ने ऐसे नानी की तरफ देखा जैसे की कोई भूत हो। शाम को नानी चाय बनाते हुए मुन्नी से बोली की बुआ की बेटी २ बिल्डिंग छोड़कर ही रहती है , चलो मिल आएं आज।

मुन्नी, “नहीं माँ उस से पिछले साल झगड़ा हो गया था , अब हम बात नहीं करते। ”
माँ, “अरे ऐसे नहीं करते बेटा, चलो जूता भी सही करवा लेंगे और बहिन से भी मिल आएंगे। तुम्हारी तो वो बहुत अच्छी सहेली भी है बचपन से । “
मुन्नी, “माँ please ….अब कोई जूता नहीं सिलवाता, नया आ जायेगा , कर दिया है आर्डर ऑनलाइन ….. .. और बोहत नयी सहेलियां मिल जाती हैं । “

माँ समझ गयी की अब बस जूता नया ही लाया जाता है सिलवाया नहीं जाता।

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